बस्तर संभाग के आदीवासियों का विधानसभा घेराव हेतू राजधानी कूच....जानिए क्या-क्या मांगों को लेकर किया जा रहा है आंदोलन

  बालोद : छत्तीसगढ़ राज्य अंतर्गत प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नेशनल हाईवे नंबर 30 पर अचानक आम लोगों का आवाजाही पूर्ण रूप से बाधित हो गया वजह थी बस्तर संभाग हजारों की संख्या में आदीवासी समुदाय से जुड़े हुए लोगों का पैदल राजधानी रायपुर मार्च । ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ राज्य अंतर्गत बस्तर संभाग के ज्यादातर जिलों विगत कुछ दिनों से जन आंदोलन एक एक कर जारी है । बस्तर के आदिवासियों का छत्तिसगढ़ सरकार  से विभिन्न मांग है ,जिस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने अबतक आश्वासन के सिवा ज्यादा कुछ नहीं किया है , जबकि बस्तर के आदिवासी छत्तिसगढ़ के मौजूदा सरकार एवं कांग्रेस पार्टी से बहुत कुछ अपेक्षा पाली हुई थी जिसकी पूर्ति नहीं हुई है । फलस्वरूप   बस्तर के आदिवासी आंदोलित हो गए हैं ,और हजारों की संख्या में राजधानी रायपुर की ओर तेजी से बढ़ रहे है । पैदल मार्च में सामिल आदीवासी नेताओं का कहना है कि वे लोग सरकार के वादाखिलाफी से नाराज़ होकर छत्तिसगढ़ विधानसभा का घेराव करने जा रहे है । पैदल मार्च में बस्तर संभाग के सभी जिला के आदीवासी समुदाय से जुड़े हुए लोग शामिल हैं । महिलाओं और बच्चों को भी इस मार्च में देखा गया है आदीवासी समुदाय से जुड़े हुए लोग राशन लेकर राजधानी रायपुर की ओर कुच कर रहे है ,शासन और प्रशासन से जुड़े हुए लोग आदीवासियों को मनाने में जुटे  हुए 
 
 बस्तर संभाग क्षेत्र के सर्व आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी विभिन्न 11 मांगों को लेकर 24 मार्च को दोपहर से बालोद जिले के पुरुर में नेशनल हाईवे धमतरी कांकेर मार्ग जाम कर दिया जिसके चलते घंटों तक छत्तिसगढ़ राज्य की जीवन रेखा मानी जाने वाली नेशनल हाईवे नंबर 30 बाधित हुआ। विधानसभा मार्च की योजना बना कर बस्तर संभाग  सभी जिला के आदीवासी समुदाय से जुड़े हुए लोग एकजुट होकर राजधानी की ओर तेजी से कुच कर रहे है । पहले तो वे बड़ी गाड़ियों में अपने वीर मेला आयोजन स्थल राजा राव पठार पहुंचे थे। जहां उनके आने की खबर मिलने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गई और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। लेकिन पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के बावजूद समाज की भीड़ पुरुर तक पहुंच गई और यहां भी चक्का जाम चलता रहा। शासन और प्रशासन से जुड़े हुए लोग आंदोलनरत आदीवासियों को मनाने का बहुत प्रयास किया , लेकिन आंदोलन में शामिल लोग अपनी मांगों को लेकर अडिग है ।


आदीवासियों की विधानसभा घेराव मार्च में बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे शामिल है ।


ये है समाज की 11 मांगे

सरकेगुड़ा एडसमेटा, न्याययिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
2-बस्तर में सैनिकरण निरस्त करते हुए पुलिस कैंप बंद हो।

फर्जी मुठभेड़ फर्जी मामलों में गिरफ्तारिया बंद करो।
4-जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की तुरंत रिहाई करो।

5- अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान सम्मत “पेसा कानून धारा 4(घ) एवं 4(ण) के तहत हर गांव में ग्राम सरकार एवं हर जिले में जिला सरकार गठन की प्रशासकीय व्यवस्था लागू हो।


 
6- संविधान के 5वीं अनुसूची के पैरा 5(2) के तहत अनुसूचित क्षेत्र में भू अधिग्रहण एवं भू हस्तातरण को विनियमित करने के लिए “आंध्र प्रदेश अनुसूचित क्षेत्र भूहस्तांतरण विनियम कानून (संशोधित) 1970 के तर्ज पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में संशोधन कर कानून बनाओ।

ग्रामसभा के निर्णय का पालन करो, बिना ग्रामसभा सहमति के किसी भी कानून में किसी भी
परियोजना के लिए जारी भूमि अधिग्रहण निरस्त करो।
8- जनता की मौलिक अधिकारों की हनन करने वाला छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम 2005 को
खारिज करो।

9- अनुसूचित इलाकों में ग्राम पंचायतों को अनारक्षित घोषणा करना बंद करो।

अनुसूचित क्षेत्र में संविधान का अनुच्छेद 243 (य ग) का पालन करते हुए सारे गैरकानूनी नगर पंचायती /नगरपालिका को भंग करते हुए पेसा कानून के तहत पंचायती व्यवस्था लागू करो।
10- बस्तर में नर संहार बंद करें। आदिवासियों के नाम से फर्जी मुठभेड़ करना बंद करें। सिलगेर गोली काण्ड में मारे गये लोगों के परिवार को 1-1 करोड़ मुआवजा दिया जाए। मृतक परिवार के एक-एक सदस्यों को सरकारी नौकरी दिया जाए।

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