भारत के दक्षिण में भी है कैलाश पर्वत, जिसके रहस्य अनसुलझे हैं- Amazing facts in Hindi

सभी जानते कि भारत के उत्तर में हिमालय पर कैलाश पर्वत स्थित है। जिस के रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि भारत के दक्षिण में भी एक कैलाश पर्वत है और इसके रहस्य भी आज तक अनसुलझे हैं। 

पहाड़ ऊपर से नीचे की तरफ काटा गया है

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है वह कैलाश पर्वत जिसे 757-783 ई में भगवान शिव की आज्ञा से राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) द्वारा तराशकर एक मंदिर बनवाया गया। सारी दुनिया इसे एलोरा का कैलाश मंदिर के नाम से जानती है। पहाड़ों पर नक्काशी और निर्माण तो पूरी दुनिया में मिलते हैं परंतु यह एकमात्र ऐसा निर्माण है जिसमें पहाड़ ऊपर से नीचे की तरफ काटा गया है। यानी सबसे पहले मंदिर का शिखर बनाया गया और अंत में उसका प्लेटफार्म। 

यह मंदिर स्वर्ग में बनाया गया और धरती के गर्भ में स्थापित किया गया

पुरातत्व विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस मंदिर को बनाने के लिए लगभग 200000 टन वजन के पत्थर को हटाया गया। मंदिर का वजन 40000 टन है। इस मंदिर की ऊंचाई 90 फीट है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का मंदिर बनाने में लगभग 150 साल का समय लगेगा लेकिन यह मंदिर मात्र 18 वर्ष में बना। इसीलिए कुछ लोग मानते हैं कि यह मंदिर स्वर्ग में बनाया गया और धरती के गर्भ में स्थापित किया गया। 

भारत में अंग्रेजी शासन काल से इस मंदिर पर लगातार रिसर्च चल रही है लेकिन आज तक दुनिया का कोई भी विशेषज्ञ और वैज्ञानिक यह नहीं बता पाया कि मंदिर को किस प्रकार से बनाया गया होगा। अंग्रेजी शासन काल के दस्तावेजों में पता चलता है कि उनके विशेषज्ञों को मंदिर के तल में स्थित गुफाओं के अंदर रेडियोएक्टिविटी का सामना करना पड़ा था। इसके कारण शोध कार्य बंद कर दिया क्या। 

भारत के उत्तर में हिमालय में स्थित कैलाश पर्वत के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। जब भी कोई शोध कार्य करता है उसे कुछ प्राकृतिक घटनाओं का सामना करना पड़ता है और फिर वह अपनी रिसर्च बंद कर देता है। 

आज तक कोई समझ नहीं पाया कि हिमालय पर यह अलग प्रकार का एक पर्वत कब और कैसे स्थापित हो गया। ठीक इसी प्रकार कोई समझ नहीं पाया कि एलोरा में जमीन के 90 फुट नीचे इतना भव्य मंदिर कैसे और कब स्थापित हो गया। 

आज तक कोई हिमालय पर स्थित कैलाश पर्वत के ऊपर नहीं पहुंच पाया है और एलोरा में स्थित कैलाश मंदिर के नीचे नहीं पहुंच पाया है। 

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