आयोग के पैनल से 80 विशेषज्ञ बाहर, गुणवत्तापूर्ण कार्य न करने पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने गुणवत्तापूर्ण कार्य न करने पर 80 विशेषज्ञों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। समीक्षा के दौरान ऐसे विशेषज्ञों को चिह्नित किए जाने के बाद उन्हें पैनल से बाहर कर दिया गया। इनकी जगह नए विशेषज्ञ शामिल किए जाएंगे। आयोग की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाए जाने के उद्देश्य विशेषज्ञों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई और ऐसे 80 विशेषज्ञों को चिह्नित किया गया, जिनके कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं मिले। इन विशेषज्ञों को कॉपियां जांचने, पेपर सेट करने, मूल्यांकन के दौरान मॉडरेशन करने और इंटरव्यू लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

चिह्नित किए गए इन 80 विशेषज्ञों को आयोग ने गोपनीय कार्य से विरत कर दिया गया। आयोग के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी के अनुसार विशेषज्ञों की गुणवत्ता की समीक्षा लगातार चलती रहेगी और समीक्षा के दौरान उनकी गुणवत्ता जैसे मूल्यांकन, पेपर निर्माण आदि में कोई कमी पाई जाती है तो भविष्य में उन्हें आयोग के पैनल से बाहर कर दिया जाएगा।विशेषज्ञों के पैनल को मिलेगा विस्तारआयोग के परीक्षा नियंत्रक के अनुसार परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आयोग के पैनल में देश भर से विशिष्ट विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है। विशेषज्ञों के पैनल को विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है।

पीसीएस-2021 में नए विशेषज्ञ शामिलपरीक्षा प्रक्रिया को गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से ही इस बार पीसीएस-2021 के इंटरव्यू में लब्ध प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को शामिल किया गया। पीसीएस के इंटरव्यू में अभी तक पूर्व आईएएस एवं आईपीएस अफसरों को ही शामिल किया जाता था, लेकिन पीसीएस-2021 में बिग्रेडियर स्तर के अधिकारियों, कुलपतियों एवं अन्य विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया, जो अपने-अपने क्षेत्र के धुरंधर माने जाते हैं।

परीक्षा प्रक्रिया पर लगातार उठ रहे थे सवाल

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा प्रक्रिया पर अभ्यर्थी लगातार सवाल उठ रहे थे। आयोग ने पिछले दिनों जब पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 की संशोधित उत्तरकुंजी एक साथ जारी की थी तो उसमें 38 सवाल गलत होने की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा अन्य परीक्षाओं में भी प्रश्नों के विवाद लगातार सामने आते रहे हैं। अभ्यर्थी कई दिनों से मांग कर रहे थे कि प्रश्नपत्र के निर्माण, मूल्यांकन, मॉडरेशन, इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया में शामिल किए जाने वाले विशेषज्ञों के कार्यों की समीक्षा कराई जाए और गलती करने वाले विशेषज्ञों को आयोग के पैनल से बाहर किया जाए

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