स्कूलों की हालत सुधारने के लिए मिशन कायाकल्प शुरू तो कर दिया गया, लेकिन नहीं बदल सकी सरकारी स्कूलों की काया

स्कूलों की हालत सुधारने के लिए मिशन कायाकल्प शुरू तो कर दिया गया, लेकिन नहीं बदल सकी सरकारी स्कूलों की काया

बदायूं। तब भी कई. सरकारी स्कूलों की 'काया' 'बदलना तो दूर बल्कि उनका जर्जर भवन तक नहीं बदला जा सका। आज भी जिले के 134 परिषदीय स्कूलों के भवन जर्जर हाल में हैं। कुछ को तो हालत इतनी खराब है। कि बच्चे बैठने से भी डरते हैं तो अध्यापकों और अभिभावकों की भी सांसे अटकी रहती हैं।

 


शासन की मंशा है कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर पढ़ाया जाए इसके लिए शासन द्वारा पंजीकृत छात्र-छात्राओं को किताबों, बैग, जूते-मोजे, यूनिफॉर्म, स्वेटर आदि निशुल्क मुहैया कराए जाते हैं। प्रतिदिन दोपहर में एमडीएम दिए जाने की भी व्यवस्था की गई है, लेकिन ये सब होते हुए भी इस पर किसी का ध्यान नहीं गया कि आज भी तमाम स्कूलों के भवन जर्जर है, जहां ये नौनिहाल शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शहर समेत तमाम ब्लॉकों में ऐसे स्कूल हैं जो इतनी खराब अवस्था में हैं कि यहां बैठते हुए बच्चे डरते हैं तो वहां के शिक्षकों समेत बच्चों के अभिभावकों की सांसे अटकी रहती हैं। कुछ भवन तो ऐसे भी हैं,जहां इनके गिरने के डर से बच्चों को बाहर खुले में बैठकर पढ़ाया जा रहा है
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