सीक्रेट रेडियो ऑपरेटन का किरदार निभाएंगे सारा अली खान, जानिए कौन थीं स्वतंत्रता सेनानी उषा मेहता


बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान ‘ऐ वतन मेरे वतन’ से ओटीटी प्लेटफार्म पर डेब्यू करने जा रही हैं। सारा अली खान ‘ऐ वतन मेरे वतन’ में स्वतंत्रता सेनानी की भूमिका में नजर आएंगी। सारा, उषा मेहता के किरदार में नजर आएंगी। ‘ऐ वतन मेरे वतन’ धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनने वाली फिल्म है। इस फिल्म को अमेजन प्राइम पर रिलीज किया जाएगा। ये भी पढ़ेंः साक्षी चोपड़ा ने फिर इंटरनेट पर ढाया कहर, बोल्डनेस देख उड़ जाएंगे होशऐ वतन मेरे वतन को कन्नन अय्यर निर्देशित करेंगे। वहीं, फिल्म की कहानी दरब फारूकी ने लिखी है।गौरतलब है कि उषा मेहता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सीक्रेट रेडियो ऑपरेटर थीं। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। उषा मेहता ने सीक्रेट रेडियो सर्विस ‘कांग्रेस रेडियो’ की शुरुआत की थी। इस सर्विस रेडियो की मदद से उस समय वह सारी जानकारी और अन्य खबरें शेयर की जाती थीं, जिस पर उस दौरान अंग्रेजों ने पाबंदी लगा रखी थी। बता दें कि 25 मार्च 1920 को गुजरात के सूरत के पास एक छोटे से गांव सरस में ऊषा का जन्‍म हुआ। पिता अंग्रेज सरकार में जज थे। ये 1928 की बात है। एक दिन सरस गांव में गांधी की एक सभा का आयोजन हुआ। उस भीड़ में आठ बरस की ऊषा भी थी। उस नन्‍ही बच्‍ची पर गांधी के शब्‍दों का इतना असर पड़ा कि उस दिन घर पहुंचकर उसने ऐलान कर दिया कि वो आजादी के आंदोलन में हिस्‍सा लेंगी। इसके बाद जॉन साइमन के नेतृत्‍व वाला साइमन कमीशन हिंदुस्‍तान आया था और भारतीय उसका विरोध कर रहे थे। 8 साल की ऊषा ने उस प्रदर्शन में हिस्‍सा लिया। 12 मार्च 1930 को जब गांधी ने दांडी यात्रा शुरू की और नमक सत्‍याग्रह की शुरुआत हुई, तब ऊषा सिर्फ 10 साल की थी। वो समंदर का पानी भरकर घर लाती और उससे घर पर नमक बनाती। ये भी पढ़ेंः फिल्म आदिपुरुष से आपत्तिजनक दृश्य नहीं हटने पर कार्रवाईस्‍कूल की पढ़ाई खत्‍म करने के बाद जब उन्‍हें आगे पढ़ने के लिए मुंबई गईं। ये वही समय था, जब गांधी का आंदोलन जोर पकड़ रहा था। भारत छोड़ो आंदोलन की भूमिका बन रही थी। गांधी की गिरफ्तारी के बाद ऊषा ने सीक्रेट रेडियो स्‍टेशन की शुरुआत की, नाम था कांग्रेस रेडियो। इस रेडियो में वो रोज हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आंदोलन की खबरें पढ़तीं। 12 नवंबर की सुबह जब ऊषा गिरगांव से उस दिन का बुलेटिन पढ़ रही थीं, इंस्‍पेक्‍टर फर्ग्‍यूसन के रेडियो ट्रांसमीटर ने तरंगें पकड़ लीं। अंग्रेजों को रेडियो स्‍टेशन का ठिकाना मिल गया और ऊषा को गिरफ्तार कर लिया गया। पांच हफ्ते तक स्‍पेशल कोर्ट में मुकदमा चला और ऊषा को चार साल की सजा हुई।

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